“जो मुझे अपने घर में टीवी देखने से भगा देते थे, आज मुझे टीवी पर देखते हैं”

एक झोपड़ पट्टी में रहने वाला इंसान, अगर बॉलीवुड का प्रसिद्ध अभिनेता बन जाए तो आप भी सोचेंगे कि आखिर ऐसा हुआ कैसे। विपिन शर्मा एक प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेता हैं, जिन्होंने 2007 में ‘तारे ज़मीन पर’ फिल्म में नंदकिशोर अवस्थी का किरदार निभाया था।

विपिन शर्मा की की प्रेरक कहानी आप इस वीडियो में देख सकते हैं।

 

हर इंसान जो बॉलीवुड में हो ज़रूरी नहीं कि उसकी ज़िंदगी हमेशा बहुत शौहरत वाली रही हो। विपिन की ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही थी, दिल्ली की उन गलियों में बसी बस्तियों में रहने वाला इंसान, जहां न घरों में बिजली होती थी और ना टीवी, लेकिन फिर भी विपिन अपनी मंज़िल को पाने के लिए उस ज़िंदगी को रूकावट नहीं मानते थे। उनके जीवन में गरीबी थी, कोई सुनहरे अवसर भी नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने रास्ते खुद निकाले और कोशिशें करते रहे।

उन्होंने कभी भी यह नहीं सोचा कि कोई आएगा और मौका देगा, पढ़ाई करते रहे और अवसर प्राप्त होते ही वे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा ) के छात्र बन गए। दिल्ली के बहुत से थिएटर में काम सीखा, यहां तक की कैनेडियन फिल्म सेंटर में भी सीखने के लिए गए। हिंदी सिनेमा में काम करने की चाह लेकर लौटे विपिन को कोई भी मौका नहीं दे रहा था, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और ऑडिशंस देते रहे।

एक दिन आमिर खान ने उनके ऑडिशन वीडियो को देखा और उन्हें तारे ज़मीन पर फिल्म में मुख्य किरदार ‘इशान अवस्थी’ के पिता का किरदार दे दिया। उन्हें यह किरदार मिलना उनके निरंतर प्रयास, और कठिन परिश्रम का नतीजा था। आज विपिन ‘तारे ज़मीन पर’, ‘सत्याग्रह’ और ‘रांझणा’ जैसी बहुत सी बॉलीवुड हिट्स में अभिनय कर चुके हैं।

 

5 भारतीय हास्य कलाकार जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए!

एक ऐसी कला के कलाकार जो आपको इस व्यस्त ज़िन्दगी में कुछ हंसी के पल दे सकते हैं। हमने 5 ऐसे कॉमेडियन के नाम एकत्रित करें हैं, जो आपको खुल के हंसने पर मजबूर कर देंगे। जानें इनके बारे में –

1-चिरायु मिस्त्री

इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद, चिरायु यही ढूंढ़ते रहते

थे कि आखिर इस सब से हासिल क्या? और फिर 20 साल की उम्र

में  उन्होंने खुद की कला को पहचाना और कॉमेडी की दुनिया में आ

गए। आज चिरायु मिस्त्री अच्छे हास्य कलाकारों में अपना नाम

अंकित कर चुके हैं और बहुत से हास्य लेख भी लिखते हैं। 

   

2 –मनीष त्यागी

   

   कमांडर मनीष त्यागी नौसेना से रिटायर्ड होने के बाद भी खाली नहीं

   बैठे, उन्होंने अपने अंदर की कला, जिससे वे लोगों को हँसा सकते थे।

   उस कला को अपना जुनून बनाया और आज वे एक प्रख्यात स्टैंड-अप

   कॉमेडियन बन चुके हैं।

   

3-आकाश मेहता

अपनी ज़िन्दगी को श्रेष्ठ तरीके से जीने वाले आकाश मेहता हास्य

कला को अपना व्यवसाय मानते हैं। उनकी इसी कला से वे लोगों के

चहिते बन चुके हैं और पिछले सात साल से लोगों को स्टेज पर

आकर हंसाते हैं और हंस कर जीना सिखाते हैं।

 

4-राहुल दुआ

  पंजाब में जन्मे राहुल दुआ एक बेहतरीन स्टैंड-अप हास्य कलाकार

  होने के साथ NDTV के राइजिंग स्टार ऑफ़ कॉमेडी 2016 के

  विजेता भी हैं। राहुल अपनी इस हास्य कला के कारण संपूर्ण देश में

  प्रख्यात हैं।

   

5-अदिति मित्तल

 देश के हास्य कलाकारों के बीच कुछ ही नाम औरतों के हैं, उन्हीं में

 से एक प्रसिद्ध महिला हास्य कलाकार हैं अदिति मित्तल। सात साल

 पहले मुंबई के एक कॉमेडी शो का हिस्सा बनीं । और आज इनके शो

 के Videos Netflix  पर भी उपलब्ध हैं। 370 हज़ार Twitter

फॉलोवर्स के साथ अदिति आज लोगों के दिलों में अपनी कला के

ज़रिये जगह बना चुकी हैं।

 

समाज में HIV/AIDS की जागरूकता फैला रही है यह १४ वर्षीय नंदिनी कुच्छल !

14 साल की लड़की नंदिनी कुच्छल जिसने समाज की एक विकट समस्या का समाधान करने का निर्णय लिया। वह समस्या जिसे हम HIV और AIDS के नाम से जानते हैं। इन दो बीमारियों का नाम सुनते ही आपके दिमाग में यही आता है कि HIV पीड़ित को स्पर्श कर लिया, या फिर उनका झूठा खा लिया तो यह बीमारी आपको भी लग जाएगी। लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं होता, HIV एक आनुवंशिक बीमारी है नाकि कोई छुआछूत की बीमारी। इस बात को हमारे समाज के बड़े-बड़े नहीं समझते लेकिन इस 14 वर्ष की लड़की ने समझा और इस सोच को बदलकर HIV पीड़ितों को आम जीवन प्रदान करने के लिए फाइट रेड नाम का मिशन भी शुरू कर दिया। यह संस्था HIV पीड़ितों की देख-रेख करता है, उन्हें शिक्षा दिलाता है और कोशिश करता है कि वो एक आम जीवन बिता सकें बिलकुल आपके और हमारी तरह।

इस युवा लड़की की प्रेरक कहानी सुनने के लिए देखें यह वीडियो।

 

“रेज़- आशा की एक किरन” नाम का NGO जो की जयपुर के HIV और एड्स पीड़ितों को हर तरह की सुविधाएं प्रदान करता है। इस NGO की एक संस्थापक नंदिनी की दादी रश्मि कुच्छल भी हैं। 8 वर्ष की आयु से ही नंदिनी ने HIV/AIDS के बच्चों को बहुत नजदीक से देखा है और वे उनके लिए कुछ करना चाहती थीं।

अपनी दादी के नक्शेकदम पर चलते हुए, 14 वर्ष की नंदिनी ने अपना ही एक मिशन शुरू किया HIV और AIDS पीड़ितों के लिए जिसका नाम FIGHT RED है।

HIV/AIDS के प्रति समाज की रूढ़िवादी सोच और उन पीड़ितों के साथ किए गए भेदभाव के खिलाफ इस युवा ने यह अभियान शुरू किया। नंदिनी ने फाइट रेड की शुरुवात लोगों से पैसे इक्कठे करके करी, उन्होंने पीड़ितों के लिए 3 लाख से भी ज़्यादा रूपए जुटाए।  हाल ही में, प्रतिष्ठित अशोका फाउंडेशन द्वारा नंदिनी को राजस्थान की पहली युवा वेंचरर के शीर्षक से सम्मानित किया गया।

फाइट रेड ने अब तक बहुत से स्कूलों में  वर्कशॉप्स करवाई हैं और एक वर्कशॉप ट्रक ड्राइवर्स के साथ भी करी है क्योंकी इनके मध्य यह बीमारी सबसे अधिक होने का डर होता है। नंदिनी एक राष्ट्रीय स्तर की स्क्वैश खिलाड़ी हैं और बाकी बच्चों की तरह वे भी सोशल मीडिया को समय देती हैं लेकिन उनका कहना है कि –“प्रत्येक युवा को HIV/AIDS से संभंधित जागरूकता समाज में फैलानी चाहिए”

 

‘It Took Me 14 Years And 300 Rejections Every Month To Get Noticed’: Actor Sumeet Vyas

In an ideal world, says Sumeet Vyas, you’ll churn out finely wrought prose day in and day out while sipping tea in a dainty cafe which overlooks the mountains. But the brutal truth is – we don’t live in an ideal world. Nothing like it. There are days when we feel like we have run out of things to write. Sometimes we come close to giving up on our story, poem, novel or book. Sumeet acknowledges that writing is hard labour. In the same breath, he admits his unfailing love for the process.

Sumeet Vyas became a household name with his portrayal of the overeager long-distance boyfriend Mikesh Choudhary in the web series “Permanent Roommates”. Hethen acted in TVF’s web series “Tripling”, a show he co-wrote. He had to endure great disappointment before his work was finally appreciated. Watch this Josh Talk to find out how Sumeet battled 300 rejections in a month.

In his talk, Sumeet admits that rejection is an occupational hazard. “As an actor, I am always auditioning for roles. I face close to 300 rejections in a month. It took me 14 long years to convince people to take notice of my work.”

His tip for dealing with rejections is simple: persistence. “Persistence conquers all things. You’ve got to persist through failure. Push yourself. You’ve got to push through shyness and self-doubt. There is no secret to success. There’s only this.” The next time rejection knocks you down, allow the appropriate time to be upset and then let it go. It’s time to move on to bigger, better things.

Watch: Actor Anshuman Jha’s Inspiring Story On Making It Big In Bollywood

Over the years, Bollywood has come to be known more for its entertainment value and less for its quality of cinema. However, there are still some who haven’t been carried away by its glitz and glamour. Anshuman Jha is one such name. His talent and hard work shines through in every film of his, be it “Love Sex Aur Dhokha”, “Bakrapur”, “Chauranga” or “Mona Darling”.

Make Your Own Decision

Anshuman’s mother wanted him to go to Delhi University. But he knew he had to go to Mumbai, for acting was his calling. His acting career began long back with Prithvi Theatre when he did his first play at 15 years of age. One thing led to another and he got his big break on the silver screen with “Love Sex Aur Dhokha”. His latest film, “Angrezi Mein Kehte Hain” won the Best Feature Film award at HBO’S South Asian International Film Festival in New York. How did Anshuman go from attending acting workshops at Prithvi Theatre in his summer break to making it big in Bollywood? Watch the video below to find out.

Don’t Live And Dream, Live The Dream

In the video, Anshuman reveals how he landed a role in the hit movie “Love Sex Aur Dhokha”. “I am from Delhi and I used to visit Mumbai to see my sister. She put me into the summertime acting workshops at Prithvi Theatre. During one such workshop, Ramnath Tharwal cast me in his play. Then it became an yearly routine. I soon completed my diploma acting course at Barry John’s Academy. I also assisted Subhash Ghai for three years. I went for a screen test for Love Sex Aur Dhokha and they selected me. The rest is history.”

He wants to try and work in different genres with different types of actors. “My next film is called Angrezi Mein Kehte, which is a romantic comedy. This was one genre I wanted to do and I am really glad I got a chance. This movie is a comedy with a lot of soul in it.”

Why Fit In When You Were Born To Stand Out

Anshuman doesn’t shy away from speaking his mind, and the unconventional characters he has played on-screen prove that. In his debut film “Love Sex aur Dhoka”, Anshuman played a low-caste boy who gets killed for falling in love with a Brahmin girl. In “Chauranga”, he essayed the role of an uptight Brahmin man who thinks he owns the village. He’s clearly a powerhouse performer. His message in the video — persistence never goes unrewarded — is not career specific. It applies to everybody out there who dreams to make it big.

Meet Akkai: The Trans Woman Whose Story Obama Wants You To Know

Dr Akkai Padmashali is a famed transgender rights activist from Karnataka and known for her bold and passionate voice in campaigning against Section 377, which criminalizes sexual minorities in India.

When Obama was recently in India, Akkai was present at the Obama Foundation Townhall to interact with the former President, where she raised a question about how she should raise her voice against this criminalization. She also asked him how the LGBTQ community should go about their movement since all they wanted was love and acceptance.

Obama, being the great leader he is, went on to answer this passionately without commenting on the legislature of the country. He did not refrain from telling her how to find her voice and to ensure that their voices are heard by the authorities. He stressed on the importance of sharing and spreading her experiences and her story. He went on to give examples of how the Black community have also faced similar situations in the past, and how art forms can also play a big role in changing the outlook of the majority towards such sensitive issues.

Akkai’s story is one filled with struggle. Having been forced to work as a sex worker, having to resort to begging to stay alive, Akkai was rejected by all layers of society because of her gender and sexuality. She highlights that all the LGBTQ community wants is peace and harmony. Akkai raises a very important question to the Indian government when she questions Section 377 and how ‘legal’ it truly is.

More power to you Akkai, we the people of India are with you!

I Was Told ‘Girls Don’t Become Pilots’, So I Started A $20 Million Aviation Company

A self-made aviation entrepreneur and cancer survivor, Kanika Tekriwal launched JetSetGo in 2013. JetSetGo is an exciting venture that has revolutionised the private aviation industry and put India on the global map.

What Is Life If Not An Adventure?

Kanika started working at the age of 17 against the wishes of her conservative Bhopal-based Marwari family, who wanted to get her married soon after she graduated from college. When she was diagnosed with cancer at the age of 21, she realised that she had to live to please herself by living life on her terms. “It was indeed a blow. But I refused to give up. It took nine months of rigorous treatment with the help of chemotherapy that cured me. Yes, that time was tough, but the best part of that time was that on the one hand, it tested me beyond my limits, on the other hand, it gave me time to think about what I have to  with my life because I knew I wouldn’t surrender and recover from this phase.”

Watch the video below as Kanika reveals what inspired her to venture into the aviation sector post an exhausting battle with cancer.

“Many customers asked why a trip should cost them as much as a Rolex,” Kanika remarks in the video. Such queries sowed the seed of an idea in her head to offer a service for booking chartered flights. Thus, JetSetGo aka ‘the Uber of the Indian skies’ was born. Eighteen months down the line, the company has 77 aircraft on offer and last month, and it recorded a 100% growth in revenue. It wouldn’t be incorrect to say that JetSetGo has completely re-defined the experience for private charter customers in a span of merely four years.

Using Her Setbacks As Stepping Stones

Traditionally dominated by men, the aviation sector is not an easy place to break into. Kanika reveals that she faced sexism at her workplace. “The clients are aghast when I am introduced as the CEO.  I receive remarks such as ‘you should take up baking cupcakes’ and the likes. Sometimes when I am assertive, I am considered arrogant whereas a man being more assertive than me is considered passionate. It has been a task, but I have taken it in my stride. I believe girls can make it happen.”

Her Winning Mantra Revealed

The taskmaster who made it to the Forbes’ Under 30 list last year, gives a very strong and clear message. “I think having faith in yourself, having courage, believing in yourself is 99% of the game when you’re starting anything. The 1% can be luck, chance, and knowledge. Because if you don’t believe in yourself, why will the world believe in you?”

Kanika’s story proves the age-old adage – where there’s will; there’s truly a way.

राजस्थान का वो गांव जो हर बेटी के जन्म पर लगाता है 111 पेड़

राजस्थान का पिपलांत्री गांव लड़की बचाओ और हरयाली बढ़ाओ का अपना ही एक नया सिद्धांत बनाकर संपूर्ण देश में एक नई मिसाल कायम कर रहा है।

अखबार में अक्सर ऐसी खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि किसी लड़की का बलात्कार हुआ, तो कहीं यौन शोषण किया गया या फिर किसी लड़की या महिला की हत्या कर दी गई। लेकिन पिपलांत्री गांव के सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल ने इस गांव का रुख ही बदल दिया। अपनी बेटी किरन की याद में श्याम सुंदर ने यह रीत चलाई कि, जब भी किसी लड़की का जन्म पिपलांत्री गांव में होगा, तो उसके नाम पर 111 पेड़ लगाए जाएंगे। वे सिर्फ पेड़ ही नहीं लगाते बल्कि इसका भी खास खयाल रखते हैं कि ये सारे पेड़ ज़िंदा भी रहें। पिछले 6 सालों में इस गांव ने नीम, शीशम, आम और आमला के लगभग 30 लाख से अधिक पेड़ लगाए हैं।

इस गांव की और यहां के सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल की अदभुत कहानी सुनने के लिए देखें यह वीडियो।

एक ऐसा देश जहां हर दिन करीब

होती हैं और न जाने कितने ही पेड़ काट दिए जाते हैं। ऐसे देश में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इसे रोकने का प्रयास कर रहे हैं। राजस्थान के पिपलांत्री गांव के सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल ऐसे ही लोगों में से एक हैं। उन्होंने एक गांव में ही सही लेकिन अनेकों कन्याओं को इस दुनिया में जन्म लेने दिया और उनके आने की ख़ुशी में 111 पेड़ भी लगवाना शुरू किया।

कुछ ही वर्ष पहले अपनी बेटी खो देने के बाद श्याम सुंदर ने अपने गांव में हर वर्ष लगभग 60 लड़कियों के जन्म लेने पर पेड़ लगाने की प्रथा शुरू करवाई। इस गांव में प्रत्येक लड़की के लिए गांव से 21,000 और लड़की के पिता से 10,000 रुपये लेकर, कुल 31,000 रुपये का फिक्स डिपाज़िट कराया जाता है। इतना ही नहीं लड़की के माता-पिता को सरकारी कागज़ों पर हस्ताक्षर भी करने होने होते हैं, जिन पर साफ़ लिखा होता है कि लड़की रोज़ स्कूल जाएगी, उसकी शादी कानूनी उम्र से पहले नहीं होगी और सारे पेड़ों का ध्यान उसके परिवार को ही रखना होगा।

संपूर्ण देश के लिए यह गांव और इसके सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल एक मिसाल हैं, जो एक ऐसा काम कर रहे हैं जिससे भ्रूण हत्या तो कम होंगी ही साथ ही देश में हरयाली भी होगी। श्याम सुंदर के इस अनूठे प्रयास से सीख लेकर संपूर्ण देश के लोगों को देश के बेहतर कल के लिए आगे आना चाहिए।